हालांकि तुर्की ने अभी तक इस हमले के लिए ज़िम्मेदार किसी भी विदेशी शक्ति का नाम नहीं लिया है, लेकिन उसके सैनिक रूस, मिस्र और यूएई समर्थित जनरल ख़लीफ़ा हफ़्तर के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं।
तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहाः केवल एक चीज़, जो मैं कह सकता हूं, वह यह है कि जिसने भी यह हमला किया है, उसने बहुत बड़ी ग़लती की है। उसे इसकी क़ीमत चुकानी होगी।
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक़, एक दूसरे तुर्क अधिकारी ने कहा है कि तुर्की के सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने वाले यएई के लड़ाकू विमान डसाल्ट मिराज थे, जो मिस्र और रूस के साथ मिलकर हफ़्तर की फ़ोर्सेज़ का समर्थन कर रहे हैं।
तुर्की संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मान्यता प्राप्त लीबिया की सरकारी सेना का समर्थन कर रहा है और उसने इस देश में अपने सैनिक भी तैनात कर रखे हैं।
सूत्रों का कहना है कि मई में हफ़्तर की सेना के क़ब्ज़े से आज़ाद करवाई गई रणनीतिक अल-वतिया एयरबेस में तुर्की सैन्य अड्डे की स्थापना करना चाहता है।
शनिवार को अल-वतिया एयर बेस पर यह हमला तुर्की के रक्षा मंत्री हुलुसी अकर के लीबियाई दौरे से वापस लौटने के कुछ ही घंटों के बाद हुआ था।
इस बात के संकेत मौजूद हैं कि तुर्की के सैन्य ठिकाने पर यूएई के युद्धक विमानों ने बमबारी की है।